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एक विदेशी महिला स्वामी विवेकानंद के समीप आकर बोली: “ मैं आपस शादी करना चाहती हूँ “

विवेकानंद बोले: ” क्यों?

मुझसे क्यों ?

क्या आप जानती नहीं की मैं एक सन्यासी हूँ?”

औरत बोली: “मैं आपके जैसा ही गौरवशाली, सुशील और तेजोमयी पुत्र चाहती हूँ और वो वह तब ही संभव होगा जब आप मुझसे विवाह करेंगे”

विवेकानंद बोले: “हमारी शादी तो संभव नहीं है, परन्तु हाँ एक उपाय है”

औरत: क्या?

विवेकानंद बोले “आज से मैं ही आपका पुत्र बन जाता हूँ, आज से आप मेरी माँ बन जाओ…

आपको मेरे रूप में मेरे जैसा बेटा मिल जायेगा.

औरत विवेकानंद के चरणों में गिर गयी और बोली की आप साक्षात् ईश्वर के रूप है.

इसे कहते है पुरुष और ये होता है पुरुषार्थ…

एक सच्चा पुरुष सच्चा मर्द वो ही होता है जो हर नारी के प्रति अपने अन्दर मातृत्व की भावना उत्पन्न कर सके!!

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❤ *रूठे जो जिन्दगी तो मना लेगे हम*
*मिले जो गम तो निभा लेगे हम*

*"मेरे बांके बिहारी जी"*

*बस तुम रहना साथ मेरे*
*रोती आँखो से भी मुस्कुरा

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शिकंजी वाला कोको कोला का मालिक बना इस बात की ख़ुशी है मगर चायवाला देश का प्रधानमंत्री बना उस बात का आजतक मातम बना रही है जमात-ए-खान्ग्रेसी।

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सभी महान आन्दोलन लोक्रप्रिय आन्दोलन होते हैं। वे मानवीय जूनून और भावनाओं का विस्फोट होते हैं , जो कि विनाश की देवी या लोगों के बीच बोले गए शब्दों की मशाल के द्वारा क्रियान्वित किये जाते हैं ......